First poem
मत पूछना कौन हो तुम । ठिठुरती सर्द में रेशमी लिबास हो तुम, तीक्ष्ण धूप में छाँव की आस हो तुम, मेरे बेज़ान से जिस्म की चिरकालिक श्वास हो तुम, बस यही मत पूछना कौन हो तुम।। निविड़ अंधकार में चपला का विश्वास हो तुम, तो साथ रहने पर सिकंदर सा आभास हो तुम, मेरे हर क्षण का अक्षुण्ण ध्यास हो तुम, बस यही मत पूछना कौन हो तुम।।